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सफलता का मंत्र / New Latest Story of Success: Very Useful

सफलता का मंत्र 

सफलता का मंत्र / New Latest Story of Success

Latest Story of Success

राजेश और पुष्पा की इकलौती संतान थी, रीता। राजेश और पुष्पा की शादी के कई सालों बाद हुई थी रीता, इसलिए बहुत ही लाड़-प्यार में नाज-नख़रों से पली थी वो। ज़रूरत से ज़्यादा प्यार और परवाह  ने कुछ हद तक रीता को बिगाड़ दिया था। 

सारा दिन टीवी देखना, पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान न देना, दूसरों से रूखा व्यवहार करना जैसी उसकी आदतों से राजेश और पुष्पा परेशान रहने लगे थे।बड़ा बंगला, कार, नौकरों की फ़ौज सब कुछ था घर में। हर सुख-सुविधा थी। सुशीला काकी भी रीता के घर काम करती थीं। वो उसकी आया थी। 

रीता के जन्म के समय से वो काम कर रही थीं। सुशीला काकी, रीता का बहुत ख़्याल रखती थीं, पर रीता उनकी उम्र का कोई लिहाज़ न करते हुए उनसे रूखा व्यवहार करती थी। सुशीला काकी की बेटी थी साधना।वो बहुत ही शांत लड़की थी। पड़ाई में बहुत होशियार थी। हमेशा कक्षा में प्रथम आती थी। वो कभी-कभी रीता के घर आती थी अपनी माँ की मदद करने के लिए। 

Story of Success in Hindi

एक दिन रीता स्कूल से लौट कर टीवी देख रही थी।उसने न तो स्कूल का यूनिफ़ॉर्म बदला था और न ही जूते उतारे, बस, वैसे ही टीवी देखते खाना खा रही थी। अचानक साधना कमरे में आई और टीवी देखने लगी।        (success story) 

"साधना, जरा मेरी जूठी थाली तो ले जा।” रीता ने साधना से कहा।

 कमरे में रीता की माँ, पुष्पा भी थी, उन्हें यह सही नहीं लगा तो उन्होंने रीता से कहा-“बेटा, अपनी जूठी थाली तुम ख़ुद उठाओ।तुम्हारे पापा भी अपनी जूठी थाली खुद उठाते हैं। वो कभी किसी से नहीं कहते।” लेकिन, रीता ने अपनी माँ की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और आख़िरकार साधना थाली लेकर चली गयी। (saflta ki kahaniyaan) 

हर साल रीता का जन्मदिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता था। घर में बहुत बड़ी पार्टी होती थी। इस साल भी तैयारी शुरू हो गयी। रीता बहुत ख़रीददारी कर रही थी। बहुत सी नयी ड्रेस उसने ख़रीदी थी। जन्मदिन के दिन वो हर थोड़ी देर में एक नयी ड्रेस पहनती थी। काम ज़्यादा होने के कारण साधना अपनी माँ की मदद करने रीता के घर आयी थी।

     “साधना, मेरी ड्रेस तो ज़रा प्रेस कर देना।” रीता ने साधना को कहा।

      “ लेकिन यह तो एक नयी ड्रेस है। इसको प्रेस की क्या ज़रूरत है?” साधना ने जब रीता से पूछा तो उसने हमेशा की तरह ही उससे ऊँची आवाज़ में बात की। साधना चुपचाप ड्रेस प्रेस करके वहीं रख कर चली गयी। घर में बहुत से बच्चे आए थे। किसी ने रीता की ड्रेस पर गर्म  प्रेस रख दी और उसकी ड्रेस जल गयी। यह देख कर रीता का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुँचा और उसने साधना को सबके सामने बहुत खरी-खोटी सुनाई-  (hindi moral story) 

     “ तुमसे कोई काम सही नहीं होता। क्या तुम जानती भी हो यह ड्रेस कितनी क़ीमती है। कभी सपने में भी तुम यह ड्रेस नहीं ख़रीद सकती। मेरी नयी ड्रेस को तुमने बर्बाद कर दिया।”

      राजेश और पुष्पा, यह सब देख-सुन रहे थे। उन्होंने किसी तरह रीता को शांत किया, लेकिन वे दोनों रीता के इस व्यवहार से बहुत दुखी थे। 

     दिन गुजरते गए।साधना जी-जान से मेहनत करके बारहवीं कक्षा अच्छे नंबरों से पास कर चुकी थी, इसलिए एक बहुत अच्छे कॉलेज में उसका दाख़िला हो गया था और उसे पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिल गयी थी।उधर, रीता हमेशा की तरह पढ़ाई से जी चुराते हुए टीवी देखने में ही लगी रहती थी। बहुत ही कम नंबरों से बड़ी मुश्किलों से पास होती थी।                

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       साधना ने बहुत ही अच्छे नंबरों से कॉलेज की पढ़ाई ख़त्म की और उसे एक बहुत ही बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई । उसकी ख़ुशी का ठिकाना न था। वो जल्दी ही अपनी माँ को यह ख़ुशख़बरी देना चाहती थी। वो सीधे रीता के घर गयी, क्योंकि वो जानती थी कि उसकी माँ वहीं होंगी। 

साधना ने अपनी माँ को जब यह ख़ुशख़बरी सुनाई तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना न था। साधना ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। तभी राजेश और पुष्पा वहाँ आए तो साधना ने उनके भी पैर छुए । 

वो दोनों भी बहुत खुश हुए। पुष्पा ने साधना को गले से लगाया और उसकी बहुत तारीफ़ की। रीता दूर खड़ी यह नजारा देख रही थी।जब पुष्पा उसके पास आई तो उसने कहा- “माँ, तुमने नौकरानी की बेटी को गले क्यों लगाया ?”

    इस पर पुष्पा ने उसे जवाब दिया - “मैंने आज सुशीला की बेटी को नहीं, बल्कि उस साधना को गले लगाया जिसने अपनी मेहनत से सफलता के इस मुक़ाम को हासिल किया और अपने माँ-बाप का सिर गर्व से ऊँचा किया।

बच्चे अपने मम्मी-पापा के पैसे पर ऐश करें, बड़ी कार में घूमें या महँगे कपड़े ख़रीदें यह सपना वो नहीं देखते, बल्कि उनके बच्चे अपनी मेहनत से ज़िंदगी में सफलता हासिल करके ऊँचे मुक़ाम पर पहुँचें और साधना की तरह अपने माँ-बाप का नाम रोशन करें, तब उन्हें बहुत ख़ुशी मिलती है। ऐसे बच्चों पर माँ-बाप को गर्व होता है।”                                           (latest success story) 

       रीता की समझ में आ गया था कि उसके मम्मी-पापा बेटी होने के कारण उससे प्यार तो करते थे, पर ऐसी इज़्ज़त उसे कभी नहीं मिली, जैसी साधना को आज मिली है और इसकी वजह भी वो समझ गयी थी।ज़िंदगी में अपनी मेहनत से सफल होना ही सबसे बड़ी ख़ुशी है और मेहनत ही सफलता हासिल करने का मंत्र है।

                                 - शाचिता गोगीनैनी

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