Latest Moral Stories in Hindi (2021)


चिंटू के पकोड़े

Latest Moral Stories in Hindi (2021) चिंटू के पकोड़े

दोस्तों, आज में आपको एक Moral Stories in Hindi बताने जा रहा हु जो की चिंटू के पकोड़े नाम से है तो चलिए बिना देरी करते हुए स्टोरी शुरू करते है |

चिंटू बहुत ही शांत और सरल स्वभाव का लड़का है । वहा एक अनाथ लड़का है , वह शहर में अकेला रहता है । चिंटू पास ही  के होटल में वेटर का काम करता है । चिंटू अपनी बातो से किसी को भी आसानी से खुश कर देता था । कई लोग तो उसे उसके स्वभाव और बात करने के तरीके के कारण उसे टिप दे  दिया करते थे। लेकिन जैसा कि हम सब जानते हैं अगर दुनिया में अच्छे लोग हैं तो बुरे भी , एक दिन चिंटू का सामना ऐसे ही आदमी से होता है।

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चिंटू जब एक ग्राहक से आर्डर ले रहा होता है तभी वहां पर बैठा हुआ  एक आदमी उसे आवाज देता है और बोलता है जल्दी से इधर आओ और मेरा आर्डर लिखो । चिंटू बोलता है मैं इनका आर्डर लेकर आपके पास आता हूं, यह बात सुनकर वह आदमी गुस्सा हो जाता यह बात उसे अपनी  बेइज्जती लगती है । अभी तो ये मामला यहीं पर शांत हो जाता है ।

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कुछ दिन बाद होटल का मैनेजर सारे वेटर्स को बुलाता है और उनसे बोलता है कि कल से तुम लोगों को यहां आने की कोई जरूरत नहीं यह होटल हमारे मालिक ने किसी पिज़्ज़ा हट वाले को बेच दी है । यह बात सुनकर चिंटू बहुत ही दुखी हो जाता है क्योंकि उसके पास पैसे कमाने का यही एकमात्र रास्ता होता है। अगले दिन से वह अपने घर पर बैठकर नए काम ढूंढने  के बारे में सोचता है , तभी वह पर उसका दोस्त  आता है और बोलता है उदास क्यों बैठे हो वह उसे  सारी बात बताता है और दोस्त के लिए चाय और पकोड़े बना कर लाता है ।

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चिंटू के हाथ के पकोड़े और चाय पी कर उसका दोस्त बहुत ही खुश हो जाता है और चिंटू को सलाह देता है कि तुम्हें अपना एक ढाबा खोल लेना चाहिए। चिंटू यह बात सुनकर बोलता है कि तुम्हारी बात में दम तो है लेकिन एक समस्या है मेरे पास इतने पैसे नहीं है उसका दोस्त बोलता है कि जितने पैसे तुम्हारे पास है उतने और मेरे बचाए हुए कुछ पैसे मिलाकर तुम अपना नया ढाबा खोल सकते हो ।

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चिंटू बोलता है ठीक है मैं ऐसा ही करता हूं चिंटू अपने बचे हुए पैसे और अपने दोस्त के बचाए पैसों से एक छोटा सा ढाबा खोलता है। और वहां पर चाय पकौड़े बेचने लगता है। कुछ ही दिनों में उसके चाय पकौड़े इतने प्रसिद्ध हो जाते हैं कि लो दूर-दूर से खाने के लिए आने लगते हैं ।

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अब चिंटू की दुकान बहुत ही अच्छे से चलने लगती है। तभी एक दिन एक गाड़ी वहां पर आती है उसमे से दो आदमी बाहर निकलते हैं देखने पर ऐसा लगता है कि वह दोनों नशे में है वह चिंटू को आर्डर देते हैं की तीन प्लेट पकोड़े लेकर आओ चिंटू उनके लिए पकोड़े लेकर आता है तभी वह दोनों कार में से शराब की बोतल निकालते हैं और कार के बोनट पर रख देते हैं यह देख कर चिंटू बोलता है कि यहां पर शराब पीना वर्जित है यह सार्वजनिक स्थान है उसकी बात सुनकर दोनों आदमियों को गुस्सा आ जाता है और वह बोलते हैं कि तुम अपना काम करो हमें जो करना है हम करेंगे , चिंटू यह सुनकर वहां से चला जाता है । 

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दोनों आदमी पकोड़े खाने के बाद जाने लगते हैं चिंटू उनसे बोलता है कि आप बिना पैसे दिए जा रहे हैं , मेरे पैसे तो देते जाइए। वह आदमी बोलता है कि मैं इस शहर का पार्षद हूं और तुम मुझसे पैसे मांग रहे हो चिंटू बोलता है मुझे नहीं पता आप क्या है और क्या नहीं , लेकिन आप मेरे पैसे देकर जाइए। वह आदमी और गुस्से में हो जाता है और गुस्से में चिंटू की पूरी दुकान तोड़ देता है चिंटू अपनी दुकान को बिखरा हुआ देखकर बहुत ही दुखी हो जाता है।

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लेकिन वहा अगले ही दिन अपनी दुकान वापस जमा लेता है । लेकिन उस पार्षद का गुस्सा इन सब बात से ठंडा नहीं होता है और वह उसकी दुकान को हटाने का नोटिस जारी कर देता है। नोटिस के कारण चिंटू को अपनी दुकान वहां से हटानी पड़ती है। वापिस से चिंटू के पास कोई काम नहीं रहता है। कुछ दिन बीतने के बाद जब चिंटू अपने घर पर अकेला  बैठा होता है तब उसके पास कुछ लोग आते हैं वह लोग चिंटू के ग्राहक ही होते हैं वह बोलते हैं कि तुम अपनी दुकान वापस क्यों नहीं खोलते आज उसने तुम्हारी दुकान बंद कराई है कल वह पूरा बाजार बंद करा देगा। हमें इसके खिलाफ कुछ करना होगा, हम उसके ऑफिस में जाकर उसका विरोध करेंगे ।

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अब चिंटू का आत्मविश्वास और बढ़ जाता और वहां अगले ही दिन पार्षद के ऑफिस में जाते हैं। इतने लोगों को देखकर पार्षद बोलता है क्या तुम मुझे डराने आए हो तभी चिंटू बोलता है नहीं मैं अपनी दुकान वापिस खुलवाने के लिए आया हूं ।जो लोग मेरे साथ आए है क्या आप उन्हें जानते हैं । मैं ही बता देता हूं जो मेरे बगल में खड़े हैं वह है हमारे शहर के इंस्पेक्टर यह रोज दिन मेरे ढाबे पर चाय पकौड़े खाने आते हैं और जो मेरी दूसरी तरफ खड़े हैं वह हमारे शहर के एमएलए के खास आदमी है उनकी पार्टी की बहुत सी मीटिंग मेरे ढाबे पर ही होती हैं।

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यह सब सुनकर पार्षद सोचने लगता है पुलिस वालों और नेताओं से उलझना मुझे भारी पड़ सकता है और वह चिंटू से बोलता है अरे इसमें गुस्सा होने की क्या बात है मैं तुम्हारी दुकान अभी खुलवा देता हूं यह लो तुम्हारी दुकान के कागज़ । दूसरे लोगों का साथ होने की वजह से चिंटू अपना ढाबा वापस खुला पाता है । यह चिंटू के व्यवहार और बात करने का नतीजा ही था की उसकी मदद के लिए इतने लोग उसके साथ खड़े हुए। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपना व्यवहार हमेशा शांत और सरल रखना चाहिए । (HindiStories)

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